मृतक को जीवन-दान
11 थोड़े दिन के बाद वह नाईन7:11 नाईन: यह नगर गलील में था, यह ताबोर पहाड़ी की दक्षिण से लगभग दो मील की दूरी पर, और कफरनहूम से ज्यादा दूर नहीं था। नाम के एक नगर को गया, और उसके चेले, और बड़ी भीड़ उसके साथ जा रही थी। 12 जब वह नगर के फाटक के पास पहुँचा, तो देखो, लोग एक मुर्दे को बाहर लिए जा रहे थे; जो अपनी माँ का एकलौता पुत्र था, और वह विधवा थी: और नगर के बहुत से लोग उसके साथ थे। 13 उसे देखकर प्रभु को तरस आया, और उसने कहा, "मत रो।" 14 तब उसने पास आकर अर्थी को छुआ; और उठानेवाले ठहर गए, तब उसने कहा, "हे जवान, मैं तुझ से कहता हूँ, उठ!" 15 तब वह मुर्दा उठ बैठा, और बोलने लगा: और उसने उसे उसकी माँ को सौंप दिया। 16 इससे सब पर भय छा गया7:16 इससे सब पर भय छा गया: एक "भय" या गंभीरता उसकी उपस्थिति से जिसे मरे हुओं को जीवित करने की सामर्थ्य थी।; और वे परमेश्वर की बड़ाई करके कहने लगे, "हमारे बीच में एक बड़ा भविष्यद्वक्ता उठा है, और परमेश्वर ने अपने लोगों पर कृपादृष्टि की है।" 17 और उसके विषय में यह बात सारे यहूदिया और आस-पास के सारे देश में फैल गई।