सूखे हाथवाले मनुष्य का चंगा होना
1 और वह फिर आराधनालय में गया; और वहाँ एक मनुष्य था, जिसका हाथ सूख गया था। 2 और वे उस पर दोष लगाने के लिये उसकी घात में लगे हुए थे, कि देखें, वह सब्त के दिन में उसे चंगा करता है कि नहीं। 3 उसने सूखे हाथवाले मनुष्य से कहा, "बीच में खड़ा हो।" 4 और उनसे कहा, "क्या सब्त के दिन भला करना उचित है या बुरा करना, प्राण को बचाना या मारना?" पर वे चुप रहे। 5 और उसने उनके मन की कठोरता से उदास होकर, उनको क्रोध से चारों ओर देखा, और उस मनुष्य से कहा, "अपना हाथ बढ़ा।" उसने बढ़ाया, और उसका हाथ अच्छा हो गया।