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Mateus 4

मसपर

1 तब उस समय पविआतएकांें गयि उसकपर4:1: यीशु की परीक्षा लेने में शैतान की मंशा थी कि मसीह को विवश करके उससे पाप करवाए जिससे की वह उद्धारकर्ता के रूप में अयोग्‍य ठहरे और मनुष्य की मुक्ति, परमेश्वर की योजना में नाकाम हो जाए। 2 वह ि, और , िरहा, तब उसलगी। (ि. 34:28) 3 तब परखनआकर उससकहा, "यदि परमवर ै, कह े, ि पतथर िाँ बन ँ।" 4 उततर िा, "िै,

मनवल नहीं,

परनहर एक वचन परमवर िकलतिरहा।’"

5 तब उसपविनगर ें गयऔर मनिपर खड़ा िा। (4:9) 6 और उससकहा, "यदि परमवर ै, अपनआपकिे; ोंि िै, वह िषय ें अपनवरगदों आजा, और ों उठेंे; कहीं ऐसि ाँों ें पतथर लग4:6: शैतान भी बाइबल का उदाहरण देता है, लेकिन गलत ढंग से जिसमें वह बाइबल अंश (इस सन्दर्भ में, भजन 91:11-12) छोड़ दिया क्योंकि वह यहाँ उपयुक्त नहीं था।" (भज. 91:11,12) 7 उससकहा, "यह िै, रभअपनपरमवर परकर" (यव. 6:16)

8 िउसएक बहपहपर गयऔर जगत और उसकभव िकर 9 उससकहा, "यदि िरकर रणकरे, ैं यह सब ूँ4:9 मैं यह सब कुछ तुझे दे दूँगा: शैतान, इस जगत का राजकुमार, अधिकार रखता था कि यीशु के सामने यह प्रस्ताव रखे। (यूह 12: 31) " 10 तब उससकहा, "ा, ोंि िै: रभअपनपरमवर रणकर, और वल उसउपसनकर" (यव. 6:13)

11 तब उसकचलगया, और वरगदआकर उसककरनलगे।

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