12 बैर से तो झगड़े उत्पन्न होते हैं,
परन्तु प्रेम से सब अपराध ढँप जाते हैं10:12 प्रेम से सब अपराध ढँप जाते हैं: पहले छिपा लेता है, प्रकट नहीं करता, फिर पापों को क्षमा करके उन्हें भूल जाता है।। (1 कुरि. 13:7, याकू. 5:20, 1 पत. 4:8)
12 बैर से तो झगड़े उत्पन्न होते हैं,
परन्तु प्रेम से सब अपराध ढँप जाते हैं10:12 प्रेम से सब अपराध ढँप जाते हैं: पहले छिपा लेता है, प्रकट नहीं करता, फिर पापों को क्षमा करके उन्हें भूल जाता है।। (1 कुरि. 13:7, याकू. 5:20, 1 पत. 4:8)