1 मन की युक्ति मनुष्य के वश में रहती है,
परन्तु मुँह से कहना यहोवा की ओर से होता है।
9 मनुष्य मन में अपने मार्ग पर विचार करता है,
परन्तु यहोवा ही उसके पैरों को स्थिर करता है।
1 मन की युक्ति मनुष्य के वश में रहती है,
परन्तु मुँह से कहना यहोवा की ओर से होता है।
9 मनुष्य मन में अपने मार्ग पर विचार करता है,
परन्तु यहोवा ही उसके पैरों को स्थिर करता है।
1 मनुष्य के मन में योजना अवश्य होती हैं,
किंतु कार्य का आदेश याहवेह के द्वारा ही किया जाता है.
9 मानवीय मस्तिष्क अपने लिए उपयुक्त मार्ग निर्धारित कर लेता है,
किंतु उसके पैरों का निर्धारण याहवेह ही करते हैं.
1 मनुष्य के मन में विचार उत्पन्न होते हैं,
परंतु मुँह के बोल यहोवा की ओर से होते हैं।
9 मनुष्य का मन उसके मार्ग की योजनाएँ बनाता है,
परंतु यहोवा उसके प्रत्येक कदम को निर्धारित करता है।
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