6 अधर्म का प्रायश्चित कृपा, और सच्चाई से होता है,
और यहोवा के भय मानने के द्वारा मनुष्य बुराई करने से बच जाते हैं।
6 अधर्म का प्रायश्चित कृपा, और सच्चाई से होता है,
और यहोवा के भय मानने के द्वारा मनुष्य बुराई करने से बच जाते हैं।
6 निस्वार्थ प्रेम तथा खराई द्वारा अपराधों का प्रायश्चित किया जाता है;
तथा याहवेह के प्रति श्रद्धा के द्वारा बुराई से मुड़ना संभव होता है.
6 अधर्म का प्रायश्चित्त करुणा और सच्चाई से होता है,
और यहोवा का भय मानने से मनुष्य बुराई से दूर रहता है।
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