2 मूर्ख का मन समझ की बातों में नहीं लगता,
वह केवल अपने मन की बात प्रगट करना चाहता है18:2 वह केवल अपने मन की बात प्रगट करना चाहता है: मूर्ख को सुख नहीं मिलता परन्तु अपनी ही बात पर बल देना, अपने बारे में और अपने विचार प्रगट करने में उसका परमानन्द है।।
13 जो बिना बात सुने उत्तर देता है, वह मूर्ख ठहरता है,
और उसका अनादर होता है।
17 मुकद्दमे में जो पहले बोलता, वही सच्चा जान पड़ता है,
परन्तु बाद में दूसरे पक्षवाला आकर उसे जाँच लेता है।