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नीतिवचन 18:2,13,17

IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

2 मूर्ख का मन समझ की बातों में नहीं लगता,

वह केवल अपने मन की बात प्रगट करना चाहता है18:2 वह केवल अपने मन की बात प्रगट करना चाहता है: मूर्ख को सुख नहीं मिलता परन्तु अपनी ही बात पर बल देना, अपने बारे में और अपने विचार प्रगट करने में उसका परमानन्द है।।

13 जो बिना बात सुने उत्तर देता है, वह मूर्ख ठहरता है,

और उसका अनादर होता है।

17 मुकद्दमे में जो पहले बोलता, वही सच्चा जान पड़ता है,

परन्तु बाद में दूसरे पक्षवाला आकर उसे जाँच लेता है।

Em outras traduções

  1. OHSS Hindi Contemporary Version

    2 विवेकशीलता में मूर्ख की कोई रुचि नहीं होती.

    उसे तो मात्र अपने ही विचार व्यक्त करने की धुन रहती है.

    13 यदि कोई ठीक से सुने बिना ही उत्तर देने लगे,

    तो यह मूर्खता और लज्जा की स्थिति होती है.

    17 यह संभव है कि न्यायालय में, जो व्यक्ति पहले होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करता है,

    सच्चा ज्ञात हो; जब तक अन्य पक्ष आकर परीक्षण न करे.

  2. HSB Hindi Standard Bible

    2 मूर्ख तो समझदारी की बातों से नहीं,

    बल्कि अपने ही मन की बातों को

    प्रकट करने से प्रसन्‍न होता है।

    13 जो बिना बात सुने उत्तर देता है,

    उसके लिए यह मूर्खता और लज्‍जा की बात है।

    17 जो मनुष्य मुकदमे में पहले बोलता है,

    वह तब तक सच्‍चा प्रतीत होता है,

    जब तक कि दूसरे पक्षवाला आकर उसे जाँच नहीं लेता।

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