17 छल-कपट से प्राप्त रोटी मनुष्य को मीठी तो लगती है,
परन्तु बाद में उसका मुँह कंकड़ों से भर जाता है।
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परन्तु बाद में उसका मुँह कंकड़ों से भर जाता है।
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