19 हे मेरे पुत्र, तू सुनकर बुद्धिमान हो,
और अपना मन सुमार्ग में सीधा चला।
20 दाखमधु के पीनेवालों में न होना,
न माँस के अधिक खानेवालों की संगति करना;
21 क्योंकि पियक्कड़ और पेटू दरिद्र हो जाएँगे,
और उनका क्रोध उन्हें चिथड़े पहनाएगी।
22 अपने जन्मानेवाले पिता की सुनना,
और जब तेरी माता बुढ़िया हो जाए, तब भी उसे तुच्छ न जानना।