सदाचारी पत्नी
10 भली पत्नी कौन पा सकता है?
क्योंकि उसका मूल्य मूँगों से भी बहुत अधिक है।
11 उसके पति के मन में उसके प्रति विश्वास है,
और उसे लाभ की घटी नहीं होती।
12 वह अपने जीवन के सारे दिनों में उससे बुरा नहीं,
वरन् भला ही व्यवहार करती है।
13 वह ऊन और सन ढूँढ़ ढूँढ़कर,
अपने हाथों से प्रसन्नता के साथ काम करती है।
14 वह व्यापार के जहाजों के समान अपनी भोजनवस्तुएँ दूर से मँगवाती है।
15 वह रात ही को उठ बैठती है,
और अपने घराने को भोजन खिलाती है
और अपनी दासियों को अलग-अलग काम देती है।
16 वह किसी खेत के विषय में सोच विचार करती है
और उसे मोल ले लेती है; और अपने परिश्रम के फल से दाख की बारी लगाती है।
17 वह अपनी कमर को बल के फेंटे से कसती है,
और अपनी बाहों को दृढ़ बनाती है। (लूका 12:35)
18 वह परख लेती है कि मेरा व्यापार लाभदायक है।
रात को उसका दिया नहीं बुझता।
19 वह अटेरन में हाथ लगाती है,
और चरखा पकड़ती है।
20 वह दीन के लिये मुट्ठी खोलती है,
और दरिद्र को सम्भालने के लिए हाथ बढ़ाती है।