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नीतिवचन 31

13 वह ऊन और सन ूँूँकर,

अपनों रसननतकरतै।

14 वह जहों समअपनजनवसगवै।

15 वह उठ ठतै,

और अपनघरजन ि

और अपनिों अलग-अलग ै।

16 वह ििषय ें िकरत

और उसै; और अपनपरिरम फल लगै।

17 वह अपनकमर बल ेंकसतै,

और अपनों बनै। (12:35)

18 वह परख ि भदयक ै।

उसकिनहीं झता।

19 वह अटरन ें लगै,

और चरखपकडै।

20 वह िलतै,

और दरिसमलनिबढ़ाै।

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