23 सबसे अधिक अपने मन की रक्षा कर;
क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है।
24 टेढ़ी बात अपने मुँह से मत बोल,
और चालबाजी की बातें कहना तुझ से दूर रहे।
25 तेरी आँखें सामने ही की ओर लगी रहें,
और तेरी पलकें आगे की ओर खुली रहें।
26 अपने पाँव रखने के लिये मार्ग को समतल कर,
तब तेरे सब मार्ग ठीक रहेंगे। (इब्रा. 12:13)
27 न तो दाहिनी ओर मुड़ना, और न बाईं ओर;
अपने पाँव को बुराई के मार्ग पर चलने से हटा ले।