4 काम करनेवाले की मजदूरी देना दान नहीं, परन्तु हक़ समझा जाता है।
अब्राहम खतने से पूर्व विश्वास से धर्मी ठहरा
5 परन्तु जो काम नहीं करता वरन् भक्तिहीन के धर्मी ठहरानेवाले पर विश्वास करता है, उसका विश्वास उसके लिये धार्मिकता गिना जाता है।
4 काम करनेवाले की मजदूरी देना दान नहीं, परन्तु हक़ समझा जाता है।
5 परन्तु जो काम नहीं करता वरन् भक्तिहीन के धर्मी ठहरानेवाले पर विश्वास करता है, उसका विश्वास उसके लिये धार्मिकता गिना जाता है।
4 मज़दूर की मज़दूरी उसका उपहार नहीं, अधिकार है. 5 वह व्यक्ति, जो व्यवस्था का पालन तो नहीं करता किंतु परमेश्वर में, जो अधर्मी को निर्दोष घोषित करते हैं, विश्वास करता है, इसी विश्वास के द्वारा धर्मी व्यक्ति के रूप में मान्यता प्राप्त करता है.
4 अब कार्य करनेवाले को मज़दूरी देना कृपा नहीं बल्कि उसका अधिकार समझा जाता है। 5 परंतु वह जो कार्य न करने पर भी भक्तिहीन को धर्मी ठहरानेवाले परमेश्वर पर विश्वास करता है, उसका विश्वास उसके लिए धार्मिकता गिना जाता है।
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