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रोमियों 8:31-34

IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

परमेश्वर का अनन्त प्रेम

31 तो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है? (भज. 118:6) 32 जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया, वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्यों न देगा? 33 परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उनको धर्मी ठहरानेवाला है। 34 फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन् मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।

Em outras traduções

  1. OHSS Hindi Contemporary Version

    31 तो इस विषय में क्या कहा जा सकता है? यदि परमेश्वर हमारे पक्ष में हैं तो कौन हो सकता है हमारा विरोधी? 32 परमेश्वर वह हैं, जिन्होंने अपने निज पुत्र को हम सबके लिए बलिदान कर देने तक में संकोच न किया. भला वह कैसे हमें उस पुत्र के साथ सभी कुछ उदारतापूर्वक न देंगे! 33 परमेश्वर के चुने हुओं पर आरोप भला कौन लगाएगा? परमेश्वर ही हैं, जो उन्हें निर्दोष घोषित करते हैं. 34 वह कौन है, जो उन्हें अपराधी घोषित करता है? मसीह येशु वह हैं, जिन्होंने अपने प्राणों का त्याग कर दिया, इसके बाद वह मरे हुओं में से जीवित किए गए, अब परमेश्वर के दायें पक्ष में आसीन हैं तथा वही हैं, जो हमारे लिए प्रार्थना करते हैं.

  2. HSB Hindi Standard Bible

    31 अतः इन बातों के विषय में हम क्या कहें? यदि परमेश्‍वर हमारी ओर है तो हमारे विरुद्ध कौन हो सकता है? 32 जिसने अपने पुत्र को भी न रख छोड़ा, बल्कि उसे हम सब के लिए दे दिया, तो वह उसके साथ हमें सब कुछ उदारता से क्यों न देगा? 33 परमेश्‍वर के चुने हुओं पर कौन आरोप लगाएगा? परमेश्‍वर ही है जो उनको धर्मी ठहराता है। 34 कौन है जो दंड की आज्ञा देगा? मसीह यीशु वह है जो मरा, इतना ही नहीं बल्कि मृतकों में से जी भी उठा, जो परमेश्‍वर के दाहिनी ओर है, और हमारे लिए विनती भी करता है।

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