रूहानी तोहफे़
1 ऐ भाइयों! मैं नहीं चाहता कि तुम पाक रूह की ने’मतों के बारे में बेख़बर रहो। 2 तुम जानते हो कि जब तुम ग़ैर क़ौम थे, तो गूँगे बुतों के पीछे जिस तरह कोई तुम को ले जाता था; उसी तरह जाते थे। 3 पस मैं तुम्हें बताता हूँ कि जो कोई ख़ुदा के रूह की हिदायत से बोलता है; वो नहीं कहता कि ईसा मला’ऊन है; और न कोई रूह उल — क़ुद्दूस के बग़ैर कह सकता है कि ईसा ख़ुदावन्द है।
4 नेअ’मतें तो तरह तरह की हैं मगर रूह एक ही है। 5 और ख़िदमतें तो तरह तरह की हैं मगर ख़ुदावन्द एक ही है। 6 और तासीरें भी तरह तरह की हैं मगर ख़ुदा एक ही है जो सब में हर तरह का असर पैदा करता है।
7 लेकिन हर शख़्स में पाक रूह का ज़ाहिर होना फ़ाइदा पहुँचाने के लिए होता है।