10 क्यूँकि अगर कोई तुझ साहिब’ऐ इल्म को बुत खाने में खाना खाते देखे और वो कमज़ोर शख़्स हो तो क्या उस का दिल बुतों की क़ुर्बानी खाने पर मज़बूत न हो जाएगा?
11 ग़रज़ तेरे इल्म की वजह से वो कमज़ोर शख़्स या’नी वो भाई जिसकी ख़ातिर मसीह मरा, हलाक हो जाएगा। 12 और तुम इस तरह भाइयों के गुनाहगार होकर और उनके कमज़ोर दिल को घायल करके मसीह के गुनाहगार ठहरते हो। 13 इस वजह से अगर खाना मेरे भाई को ठोकर खिलाए तो मैं कभी हरगिज़ गोश्त न खाऊँगा, ताकि अपने भाई के लिए ठोकर की वजह न बनूँ।