24 चुनाँचे हर आदमी घास की तरह है, और उसकी सारी शान — ओ — शौकत घास के फूल की तरह।
घास तो सूख जाती है, और फूल गिर जाता है।
25 लेकिन ख़ुदावन्द का कलाम हमेशा तक क़ाईम रहेगा।
ये वही ख़ुशख़बरी का कलाम है जो तुम्हें सुनाया गया था।
24 चुनाँचे हर आदमी घास की तरह है, और उसकी सारी शान — ओ — शौकत घास के फूल की तरह।
घास तो सूख जाती है, और फूल गिर जाता है।
25 लेकिन ख़ुदावन्द का कलाम हमेशा तक क़ाईम रहेगा।
ये वही ख़ुशख़बरी का कलाम है जो तुम्हें सुनाया गया था।
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