4 उसके या’नी आदमियों के रद्द किए हुए, पर ख़ुदा के चुने हुए और क़ीमती ज़िन्दा पत्थर के पास आकर, 5 तुम भी ज़िन्दा पत्थरों की तरह रूहानी घर बनते जाते हो, ताकि काहिनों का मुक़द्दस फ़िरक़ा बनकर ऐसी रूहानी क़ुर्बानियाँ चढ़ाओ जो ईसा मसीह के वसीले से ख़ुदा के नज़दीक मक़बूल होती है।
6 चुनाँचे किताब — ए — मुक़द्दस में आया है:
देखो, मैं सिय्यून में कोने के सिरे का चुना हुआ
और क़ीमती पत्थर रखता हूँ;
जो उस पर ईमान लाएगा हरगिज़ शर्मिन्दा न होगा।
7 पस तुम ईमान लाने वालों के लिए तो वो क़ीमती है, मगर ईमान न लाने वालों के लिए
जिस पत्थर को राजगीरों ने रद्द किया वही
कोने के सिरे का पत्थर हो गया।
8 और
ठेस लगने का पत्थर
और ठोकर खाने की चट्टान हुआ,
क्यूँकि वो नाफ़रमान होकर कलाम से ठोकर खाते हैं और इसी के लिए मुक़र्रर भी हुए थे।