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1 Tessalonicenses 2

अपनआनरखन

1 इयों! आप नति हमआऩाइद2 बलि ा’ि वजपहल़ििें ु:उठऔर इज़्हम अपऩुें ििि ़ु़ुशखबरबड़ी ाँ़िें ँ।

3 ूँि हमनसहत मर4 बलि ़ुहम मक़्करक़ुशखबरहमहम बयकरतैं; आदमिों नहीं बलि ़ु़ुकरनिहमिों आजै।

5 ूँि ा’ि कभहमकलें ़ुमद गई लच परबऩुइसकगवै! 6 और हम आदमिों इज़्हतैं औरों अगरचमसरसवजह पर सकते।

7 बलि ितरह ाँ अपनबचों लतउसतरह हम दरिनररहे। 8 और उसतरह हम बहअहसनमकर ़ु़ुशखबरबलि अपनतक ें ़ी े; इस ि हमगए े! 9 ूँि इयों! हमहनत और मशक़्ि हम ें िपर लनरजिहनत मजकरकें ़ु़ुशखबरमनी।

10 गवऔर ़ुि ईमहम और तब़ी और े’ऐबआए11 ाँनतो। ि ितरह अपनबचों करतउसतरह हम ें हर एक नसहत करतऔर िऔर समझरहे। 12 ि लचलन ़ुयकें अपनदशऔर जलें ै।

13 इस हम ि़ा ़ुकरतैं ि जब ़ु़ाहमिपहुँउसआदमिों कलसमझ कर नहीं बलि हक़ीें ़ुकलकर ़ुिऔर ें ईमअसर कर रहै।

14 इसलिि इयों!, ़ुउन कलितरह बन गए यहिें मसईसें ैं ूँि अपऩौों वहतकल़ें उठउनोंयहिों े। 15 िों़ुवनईसऔर हम सतसतकर िि़ुपसननहीं आतऔर सब आदमिों ़िैं। 16 और हमें ़ै़ौों उनकनजिकलमनह करतैं ि उन ों हमभरतरहे; िउन पर इनिगया।

17 इयों! जब हम ़े अरि़ािें ि िगए हम कमआरज़ू रत खनऔर ़्िी। 18 इस हम ा’एक दफ़ा' नहीं बलि दफ़ा' आनमगर हमें रखा। 19 भलहमउमऔर ़ुऔर ़्ै? हम़ुवनमनउसकआनवक़्े। 20 हमजलऔर ़ुीं ो।

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