6 पस, औरों की तरह सोते न रहो, बल्कि जागते और होशियार रहो। 7 क्यूँकि जो सोते हैं रात ही को सोते हैं और जो मतवाले होते हैं रात ही को मतवाले होते हैं।
8 मगर हम जो दिन के हैं ईमान और मुहब्बत का बख़्तर लगा कर और निजात की उम्मीद कि टोपी पहन कर होशियार रहें। 9 क्यूँकि ख़ुदा ने हमें ग़ज़ब के लिए नहीं बल्कि इसलिए मुक़र्रर किया कि हम अपने ख़ुदावन्द ईसा मसीह के वसीले से नजात हासिल करें।