2 कि तू कलाम की मनादी कर वक़्त और बे वक़्त मुस्त’इद रह, हर तरह के तहम्मील और ता’लीम के साथ समझा दे और मलामत और नसीहत कर।
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2 कि तू कलाम की मनादी कर वक़्त और बे वक़्त मुस्त’इद रह, हर तरह के तहम्मील और ता’लीम के साथ समझा दे और मलामत और नसीहत कर।