12 फिर मैंने छोटे बड़े सब मुर्दों को उस तख़्त के सामने खड़े हुए देखा, और किताब खोली गई, या’नी किताब — ए — हयात; और जिस तरह उन किताबों में लिखा हुआ था, उनके आ’माल के मुताबिक़ मुर्दों का इन्साफ़ किया गया। 13 और समुन्दर ने अपने अन्दर के मुर्दों को दे दिया, और मौत और 'आलम — ए — अर्वाह ने अपने अन्दर के मुर्दों को दे दिया, और उनमें से हर एक के आ’माल के मुताबिक़ उसका इन्साफ़ किया गया।
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मुक़ाशिफ़ा 20
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