3और फिर ला’नत न होगी, और ख़ुदा और बर्रे का तख़्त उस शहर में होगा, और उसके बन्दे उसकी इबादत करेंगे।
13मैं अल्फ़ा और ओमेगा, पहला और आख़िर, इब्तिदा और इन्तिहा हूँ।
21ख़ुदावन्द ईसा का फ़ज़ल मुक़द्दसों के साथ रहे। आमीन।
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3और फिर ला’नत न होगी, और ख़ुदा और बर्रे का तख़्त उस शहर में होगा, और उसके बन्दे उसकी इबादत करेंगे।
13मैं अल्फ़ा और ओमेगा, पहला और आख़िर, इब्तिदा और इन्तिहा हूँ।
21ख़ुदावन्द ईसा का फ़ज़ल मुक़द्दसों के साथ रहे। आमीन।
17पस अगर तू यहूदी कहलाता और शरी’अत पर भरोसा और ख़ुदा पर फ़ख़्र करता है।
23तू जो शरी’अत पर फ़ख़्र करता है? शरी’अत की मुख़ालिफ़त से ख़ुदा की क्यूँ बे’इज़्ज़ती करता है?
24क्यूँकि तुम्हारी वजह से ग़ैर क़ौमों में ख़ुदा के नाम पर कुफ़्र बका जाता है "चुनाँचे ये लिखा भी है।"
7पस जैसे तुम हर बात में ईमान और कलाम और इल्म और पूरी सरगर्मी और उस मुहब्बत में जो हम से आगे हो गए हो, वैसे ही इस ख़ैरात के काम में आगे ले जाओ।
9क्यूँकि तुम हमारे ख़ुदावन्द ईसा मसीह के फ़ज़ल को जानते हो कि वो अगरचे दौलतमन्द था मगर तुम्हारी ख़ातिर ग़रीब बन गया ताकि तुम उसकी ग़रीबी की वजह से दौलतमन्द हो जाओ।
24पस अपनी मुहब्बत और हमारा वो फ़ख़्र जो तुम पर है कलीसियाओं के रु — ब — रु उन पर साबित करो।
8लेकिन मैं ईद’ए पिन्तेकुस्त तक इफ़िसुस में रहूँगा।
13जागते रहो ईमान में क़ाईम रहो मर्दानगी करो मज़बूत हो।
24मेरी मुहब्बत ईसा मसीह में तुम सब से रहे। आमीन।