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Colossenses 2

1 ैं हतूँ ि ि ैं ििदर ाँ़िकर रहूँ ि, िशहर ों िऔर उन तमईमनदों िि़ानहीं 2 ियह ि उन िसलअफ़़्ाऔर वह हबबत ें एक ँ, ि उनें वह भरिसमझ ै। ूँि ैं हतूँ ि वह ़ुें। ै? मस़ु3 उसें िमत और इल'इरफ़ातम़ाैं।

4 रजबरदरहें ि मकबज़ािसहऔर अल़ाे। 5 ूँि गरचैं िि़िनहीं ूँ, िें ैं ूँ। और ैं यह कर ़ुूँ ि ितननज़़्िदग़ारतो, ि मसपर ईमितऩ्ै।

रवयतों अज़ाऔर मसें नय़िदग

6 मनईसमस़ुवनपर कर िै। अब उस ें ़िदग़ाो। 7 उस ें जडपकड़ो, उस पर अपऩिदगकरो, उस ईमें मज़्रहिमकगई और रग़ालबर

8 िरहि सफ़िऔर महजों अपनें े। ऐसों सरचशमसनहीं बलि ियतें और इस िाँ ें ैं। 9 ूँि मसें ़ुइयत ा’जसिकर नत करतै।

10 और मसें ैं उस ें शरकर िगयै। वहहर मरऔर इख़्िसर ै। 11 उस ें आतवक़्तनकरवगया। ियह तनों नहीं िगयबलि मसवसे। उस वक़्िबत उतगई, 12 बपतिकर मसदफगयऔर ईम़िकर िगया। ूँि ़ु़ुदरत पर ईमे, उस़ुदरत पर िमसों ें ़िकर िा।

13 पहलअपनों और मख़्िलत वजह े, िअब ़ुमकमस़िकर िै। उस हमतमों आफकर िै। 14 और अहकवह दसहम़िउसउस रदकर िा। ाँ, उस हम करकउसों सलपर जडिा। 15 उस मरों और इख़्िों उन हथिकर सब मनउन ी। ाँ, मससलवह ़ु़ैबन गए और उनें तह ें उस चलनपड़ा।

16 ाँमकइस वजह जरिठहरि ईदें मनो। इसतरह अदलत करअगर हकईद सबत िनहीं मने। 17 यह ़ें िआनहक़ीैं जबकि यह हक़ी़ुमसें ै।

18 ऐसजरिठहऱाितनऔर िों इबदत पर इसरकरतैं। बड़ी तफ़्अपनें ें बयकरतकरतउन ़ैररहन ़़््ैं। 19 ूँ उनों मसलगरहनिअगरचवह बदन िै। वह़ों और पटों िबदन सहकर उस ़्तलििों ै। ूँ बदन ़ुमदद तरक़़्ी करतै।

20 मसमर कर िाँ ों आज़ागए ो। अगर ऐस़िदगऐसूँ ़ारति अभतक इस ििियत ो? ूँ इस अहरहतो? 21 मसलन "इसलगा, वह चखना, यह ा।" 22 इन तम़ों मक़्सद यह ि इसकर ँ। यह िअहऔर ैं। 23 शक यह अहगढ़े मज़्हबइज़, ितनऔर िसख़्दबतक़ा़ा करतैं िमत पर हसिलगतैं, ियह ैं और िि़्िकरतैं।

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