5 जो अब तक ईमान न लाए हों उन के साथ अक़्लमन्दी का सुलूक करो। इस सिलसिले में हर मौक़े से फ़ाइदा उठाओ। 6 तुम्हारी बातें हर वक़्त मेहरबान हो, ऐसी कि मज़ा आए और तुम हर एक को मुनासिब जवाब दे सको।
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5 जो अब तक ईमान न लाए हों उन के साथ अक़्लमन्दी का सुलूक करो। इस सिलसिले में हर मौक़े से फ़ाइदा उठाओ। 6 तुम्हारी बातें हर वक़्त मेहरबान हो, ऐसी कि मज़ा आए और तुम हर एक को मुनासिब जवाब दे सको।