11 और चूँकि मुल्क में कंगाल हमेशा पाए जाएँगे, इसलिए मैं तुझको हुक्म करता हूँ कि तू अपने मुल्क में अपने भाई या’नी कंगालों और मुहताजों के लिए अपनी मुट्ठी खुली रखना।
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11 और चूँकि मुल्क में कंगाल हमेशा पाए जाएँगे, इसलिए मैं तुझको हुक्म करता हूँ कि तू अपने मुल्क में अपने भाई या’नी कंगालों और मुहताजों के लिए अपनी मुट्ठी खुली रखना।
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