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इस्तिसना 31

यहइसएल रहनबनन

1 और कर यह ें सब इसईलिों , 2 और उनककहि "ैं आज ि िएक बरस ूँ, ैं अब चल िनहीं सकता; और ़ुवनझसकहि इस यरदन नहीं एगा। 3 इसलि़ुवऩुआगआगएगा, और वहउन ़ौों आगकरऔर उसकिा; और ़ुवनकहै, यशू’आगआगएगा। 4 और ़ुवनउनसवहकरउसनअमिों दशऔर 'ओज और उनकिा, ि उनककर ा। 5 और ़ुवनउनकमसिकसिएगा, और उनसउन सब ों िआनैंमकिैं। 6 मजऔर सलरख; मत डर और उनस़ौा, ूँि ़ुवऩु़ुै; वह झसदसतबरदनहीं ा, और मक़ेा।" 7 ियशू’कर सब इसईलिों मनउससकहा, "मजऔर सलरख; ूँि इस ़ौउस ें एगा, िसक़ुवनउनकसम कर कहा, और उनकउसकिबनएगा। 8 और ़ुवनआगआगचला; वह रहा, वह दसतबरदा, ़ेा; इसलि़ौकर और िो।"

सरे’आम िपढ

9 और इस शरी’अत िखकर उसिों े, बनऔर ़ुवन'अहद उठे, और इसईल सब ़ुों परिा। 10 िउनकयह िा, हर बरस आख़िें टकु’अययन वक़्पर पड़िों 'ईद ें, 11 जब सब इसईल़ुवऩुमनउस जगह कर ़िों िवह ़ुा, इस शरी’अत पढकर सब इसईलिों ा। 12 ों ो, ा’मरों और 'औरतों और बचों और अपनबसिों ़िों जमा' करना, ि वह ें और ें और ़ुवऩु़ौें और इस शर"अत सब ों पर एहतिरखकर 'अमल करें; 13 और उनकलडिनका’नहीं वह ें, और जब तक उस ें रहिपर ़ा करन31:13 नदीयरदन ो, तब तक वह बरबर ़ुवऩु़ौननें।"

इसएल ा’फरमश’गकरन

14 ि़ुवनकहा, ", मरनिपहुँे। इसलियशू’और ों ़ेइजितमा’ें ़ि, ि ैं उसियत करूँ।" ाँऔर यशू’रवकर ़ेइजितमा’ें ़ि15 और ़ुवनदल ें कर ़ेें नम, और दल ़ेदरव़े पर ठहर गया। 16 तब ़ुवनकहा, ", अपन31:16 जैसे मर जाएगा एगा; और यह उठकर उस अजनबा’ों रवें, िनकवह कर रहें़िऔर झकेंे, और उस 'अहद ैंउनकाँेंे। 17 तब उस वक़्हर उन पर भडा, और ैं उन ूँऔर उनसअपनुँिूँा; और वह िगल िऔर बहबलऔर बतें उन पर आएी, ाँवह उस िकहेंे, 'हम पर यह बलइसवजह नहीं आईि हम़ुहमनहीं?' 18 उस वक़्उन सब बदिों वजह े, और ा’ों तरफइल कर उनोंोंैं अपनुँिूँा। 19 इसलियह अपनििो, और उसबनइसईल िऔर उनकि़्करा, ि यह बनइसईल ़िगवरहे। 20 इसलिि जब ैं उनकउस ें, िसम ैंउनकऔर जहाँ 31:20 अज़ हद ज़रखेज़ मुल्क में और शहद बहतपहुँूँा, और वह ़ूकर े; तब वह और ा’ों तरफिऔर उनकइबदत करेंऔर झकहक़ीेंऔर 'अहद ेंे। 21 और ूँ ि जब बहबलऔर बतें उन पर आएी, गवतरह उन पर शहदत ा; इसलिि इसउनकऔलकभनहीं ी, ूँि इस वक़्उनकउस ें पहुँपहलिसकसम ैंै, ैं उनकिसमें वह ैं नतूँ।" 22 इसलिउसिइस ििऔर उसबनइसईल िा। 23 और उसनयशू’ियत और कहा, "मजा, और सलरख; ूँि बनइसईल उस ें एगिसकसम ैंउनसी, और ैं रहूँा।" 24 और ऐसि जब इस शरी’अत ों एक िें िऔर वह गई, 25 िों े, ़ुवन'अहद उठकरतकहा, 26 "इस शरी’अत िकर ़ुवनअपऩु'अहद सनरख ो, ि वह बरख़िगवरहे। 27 ूँि ैं बग़ावत और गरदनकशनतूँ। ो, अभ़ुवनबग़ावत करतरहो, मरनितऩ्करे? 28 अपनसब ़ुों और 'उहदों जमा' करो, ि ैं यह ें उनकों ें ूँ और आसमऔर उनकबरख़िगवबनँ। 29 ूँि ैं नतूँ ि मरनअपनिे, और उस िसकैंमकििओगे; तब आख़ििों ें पर आफी, ूँि अपनों ़ुवऩुििवह करउसकनजें ै।"

30 इसलिइस ें इसईल जमा’अत आख़ितक कह

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