Pular para o conteúdo
Publicidade

वाइज़ 3:1-8,11

हर शह का वक्त है

1 हर चीज़ का एक मौक़ा' और हर काम का जो आसमान के नीचे होता है एक वक़्त है।

2 पैदा होने का एक वक़्त है, और मर जाने का एक वक़्त है;

दरख़्त लगाने का एक वक़्त है, और लगाए हुए को उखाड़ने का एक वक़्त है;

3 मार डालने का एक वक़्त है, और शिफ़ा देने का एक वक़्त है;

ढाने का एक वक़्त है, और ता’मीर करने का एक वक़्त है;

4 रोने का एक वक़्त है, और हँसने का एक वक़्त है;

ग़म खाने का एक वक़्त है, और नाचने का एक वक़्त है;

5 पत्थर फेंकने का एक वक़्त है, और पत्थर बटोरने का एक वक़्त है;

एक साथ होने का एक वक़्त है, और एक साथ होने से बाज़ रहने का एक वक़्त है;

6 हासिल करने का एक वक़्त है, और खो देने का एक वक़्त है;

रख छोड़ने का एक वक़्त है, और फेंक देने का एक वक़्त है;

7 फाड़ने का एक वक़्त है, और सोने का एक वक़्त है;

चुप रहने का एक वक़्त है, और बोलने का एक वक़्त है;

8 मुहब्बत का एक वक़्त है, और 'अदावत का एक वक़्त है;

जंग का एक वक़्त है, और सुलह का एक वक़्त है।

11 उसने हर एक चीज़ को उसके वक़्त में खू़ब बनाया और उसने अबदियत को भी उनके दिल में जागुज़ीन किया है; इसलिए कि इंसान उस काम को जो ख़ुदा शुरू' से आख़िर तक करता हैं दरियाफ़्त नहीं कर सकता।

Estes versículos te tocaram? Ore agora!

+581 estão orando agora.

Junte-se à corrente de oração.