फ़र्ज़न्द और माँ–बाप
1 ऐ फ़र्ज़न्दों! ख़ुदावन्द में अपने माँ — बाप के फ़रमाबरदार रहो, क्यूँकि यह ज़रूरी है। 2 "अपने बाप और माँ की इज़्ज़त कर (ये पहला हुक्म है जिसके साथ वा’दा भी है) 3 ताकि तेरा भला हो, और तेरी ज़मीन पर उम्र लम्बी हो।"
1 ऐ फ़र्ज़न्दों! ख़ुदावन्द में अपने माँ — बाप के फ़रमाबरदार रहो, क्यूँकि यह ज़रूरी है। 2 "अपने बाप और माँ की इज़्ज़त कर (ये पहला हुक्म है जिसके साथ वा’दा भी है) 3 ताकि तेरा भला हो, और तेरी ज़मीन पर उम्र लम्बी हो।"