17 और नजात का टोप, और रूह की तलवार, जो ख़ुदा का कलाम है ले लो; 18 और हर वक़्त और हर तरह से रूह में दुआ और मिन्नत करते रहो, और इसी ग़रज़ से जागते रहो कि सब मुक़द्दसों के वास्ते बिला नाग़ा दुआ किया करो,
17 और नजात का टोप, और रूह की तलवार, जो ख़ुदा का कलाम है ले लो; 18 और हर वक़्त और हर तरह से रूह में दुआ और मिन्नत करते रहो, और इसी ग़रज़ से जागते रहो कि सब मुक़द्दसों के वास्ते बिला नाग़ा दुआ किया करो,