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ख़ुरुज 18

17 तब ससउससकहा, ि "अचनहीं करता। 18 इससबलि यह ैं त’ई े, ूँि यह िबहै। 19 अकइसनहीं कर सकता। इसलिअब , ैं सलूँ और ़ुरहे! इन ों ि़ुमनकर और इनकसब ु’आमि़ुपहुँिकर20 और ियतों और शरी’अत ें इनकिकर, और िइनकचलनऔर इनककरनवह इनकबतकर21 और इन ों ें ऐसयकशख़्ों ़ुतरस और सचऔर िवत मन ों, और उनकहज़ाहज़ाऔर और पचपचऔर दस दस आदमिों पर िबने; 22 ि वह हर वक़्ों इनिकरें और ऐसि बड़े बड़े दमें वह और ों ़ैसल़ुकर िकरें। ूँ हलएगऔर वह उसकउठें शरोंे। 23 अगर यह करऔर ़ुऐसे, सब सकऔर यह अपनजगह इते।"

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