15 कहीं ऐसा न हो कि तू उस मुल्क के बाशिन्दों से कोई 'अहद बाँध ले और जब वह अपने मा’बूदों की पैरवी में ज़िनाकार ठहरें और अपने मा’बूदों के लिए क़ुर्बानी करें, और कोई तुझ को दा’वत दे और तू उसकी क़ुर्बानी में से कुछ खा ले;
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15 कहीं ऐसा न हो कि तू उस मुल्क के बाशिन्दों से कोई 'अहद बाँध ले और जब वह अपने मा’बूदों की पैरवी में ज़िनाकार ठहरें और अपने मा’बूदों के लिए क़ुर्बानी करें, और कोई तुझ को दा’वत दे और तू उसकी क़ुर्बानी में से कुछ खा ले;
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