14 क्यूँकि पूरी शरी’अत पर एक ही बात से 'अमल हो जाता है, या; नी इससे कि "तू अपने पड़ोसी से अपनी तरह मुहब्बत रख।"
14 क्यूँकि पूरी शरी’अत पर एक ही बात से 'अमल हो जाता है, या; नी इससे कि "तू अपने पड़ोसी से अपनी तरह मुहब्बत रख।"