7 पस जिस तरह कि पाक रूह कलाम में फ़रमाता है,
"अगर आज तुम उसकी आवाज़ सुनो,
8 तो अपने दिलों को सख़्त न करो,
जिस तरह ग़ुस्सा दिलाने के वक़्त
आज़माइश के दिन जंगल में किया था।
7 पस जिस तरह कि पाक रूह कलाम में फ़रमाता है,
"अगर आज तुम उसकी आवाज़ सुनो,
8 तो अपने दिलों को सख़्त न करो,
जिस तरह ग़ुस्सा दिलाने के वक़्त
आज़माइश के दिन जंगल में किया था।