6 लेकिन जो ख़िदमत ईसा को मिल गई है वह दुनिया के इमामों की ख़िदमत से कहीं बेहतर है, उतनी बेहतर जितना वह अह्द जिस का दरमियानी ईसा है पुराने अह्द से बेहतर है। क्यूँकि यह अह्द बेहतर वादों की बुनियाद पर बाँधा गया।
7 अगर पहला अह्द बेइल्ज़ाम होता तो फिर नए अह्द की ज़रूरत न होती।
8 लेकिन ख़ुदा को अपनी क़ौम पर इल्ज़ाम लगाना पड़ा। उस ने कहा,
"ख़ुदावन्द फ़रमाता है कि देख! वो दिन आते हैं
कि मैं इस्राईल के घराने और यहूदाह के घराने से एक नया 'अहद बाँधूंगा।
9 यह उस अह्द की तरह नहीं होगा जो मैंने उनके बाप दादा से उस दिन बाँधा था,
जब मुल्क — ए — मिस्र से निकाल लाने के लिए उनका हाथ पकड़ा था,
इस वास्ते कि वो मेरे अहद पर क़ाईम नहीं रहे
और ख़ुदा वन्द फ़रमाता है कि मैंने उनकी तरफ़ कुछ तवज्जह न की।
10 ख़ुदावन्द फ़रमाता है कि,
जो अहद इस्राईल के घराने से उनदिनों के बाद बाँधूंगा, वो ये है
कि मैं अपने क़ानून उनके ज़हन में डालूँगा,
और उनके दिलों पर लिखूँगा,
और मैं उनका ख़ुदा हूँगा,
और वो मेरी उम्मत होंगे।
11 और हर शख़्स अपने हम वतन
और अपने भाई को ये तालीम न देगा कि तू ख़ुदावन्द को पहचान,
क्यूँकि छोटे से बड़े तक सब मुझे जान लेंगे।
12 क्यूँकि मैं उन का क़ुसूर मुआफ़ करूँगा।
और मै उनके गुनाहों को याद ना रखुँगा।"
13 इन अल्फ़ाज़ में ख़ुदा एक नए अह्द का ज़िक्र करता है और यूँ पुराने अह्द को रद्द कर देता है। और जो रद्द किया और पुराना है उस का अन्जाम क़रीब ही है।