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यर्मयाह 31

31 ", वह िआतैं, ़ुवनरमै, जब ैं इसईल घरऔर यहघरनय'अहद ूँा; 32 उस 'अहद िनहीं, ैंउनकिजब ैंउनकदसतगी, ि उनकििँ; और उनोंउस 'अहद ़ा अगरचैं उनकिा, ़ुवनरमै। 33 बलि यह वह 'अहद ैं उन िों इसईल घरूँा, ़ुवनरमै: ैं अपनशरी’अत उनकिें रखूँा, और उनकिपर उसिूँा; और ैं उनक़ुूँा, और वह ोंे; 34 और वह िअपनअपनपड़ोऔर अपनअपनयह कह कर ा’नहीं ेंि ़ुवनपहचो, ूँि बड़े तक वह सब ेंे, ़ुवनरमै; इसलिि ैं उनकबदकिरदबख़्ूँऔर उनककरूँा।"

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