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नोहा 3:1-3,21-26

ख़ुदा की भरोसेमंदी में उम्मीद

1 मैं ही वह शख़्स हूँ जिसने उसके ग़ज़ब की लाठी से दुख पाया।

2 वह मेरा रहबर हुआ, और मुझे रौशनी में नहीं, बल्कि तारीकी में चलाया;

3 यक़ीनन उसका हाथ दिन भर मेरी मुख़ालिफ़त करता रहा।

21 मैं इस पर सोचता रहता हूँ, इसीलिए मैं उम्मीदवार हूँ।

22 ये ख़ुदावन्द की शफ़क़त है, कि हम फ़ना नहीं हुए, क्यूँकि उसकी रहमत ला ज़वाल है।

23 वह हर सुबह ताज़ा है; तेरी वफ़ादारी 'अज़ीम है

24 मेरी जान ने कहा, "मेरा हिस्सा ख़ुदावन्द है, इसलिए मेरी उम्मीद उसी से है।"

25 ख़ुदावन्द उन पर महरबान है, जो उसके मुन्तज़िर हैं; उस जान पर जो उसकी तालिब है।

26 ये खू़ब है कि आदमी उम्मीदवार रहे और ख़ामोशी से ख़ुदावन्द की नजात का इन्तिज़ार करे।

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