3 जब उसके पकड़वाने वाले यहूदाह ने ये देखा, कि वो मुजरिम ठहराया गया, तो अफ़्सोस किया और वो तीस रुपऐ सरदार काहिन और बुज़ुर्गों के पास वापस लाकर कहा। 4 "मैंने गुनाह किया, कि बेक़ुसूर को क़त्ल के लिए पकड़वाया।" उन्हों ने कहा "हमें क्या! तू जान।" 5 वो रुपऐऊँ को मक़दिस में फेंक कर चला गया। और जाकर अपने आपको फाँसी दी।