5 हिकमत हासिल कर, समझ हासिल कर,
भूलना मत और मेरे मुँह की बातों से नाफ़रमान न होना।
6 हिकमत को न छोड़ना, वह तेरी हिफ़ाज़त करेगी;
उससे मुहब्बत रखना, वह तेरी निगहबान होगी।
7 हिकमत अफ़ज़ल असल है, फिर हिकमत हासिल कर;
बल्किअपने तमाम हासिलात से समझ हासिल कर;
8 उसकी ता’ज़ीम कर, वह तुझे सरफ़राज़ करेगी;
जब तू उसे गले लगाएगा, वह तुझे 'इज़्ज़त बख़्शेगी।