6 ऐ काहिल, चींटी के पास जा,
चाल चलन पर ग़ौर कर और 'अक़्लमंद बन।
7 जो बावजूद यह कि उसका न कोई सरदार,
न नाज़िर न हाकिम है,
8 गर्मी के मौसिम में अपनी खू़राक मुहय्या करती है,
और फ़सल कटने के वक़्त अपनी ख़ुराक जमा' करती है।
6 ऐ काहिल, चींटी के पास जा,
चाल चलन पर ग़ौर कर और 'अक़्लमंद बन।
7 जो बावजूद यह कि उसका न कोई सरदार,
न नाज़िर न हाकिम है,
8 गर्मी के मौसिम में अपनी खू़राक मुहय्या करती है,
और फ़सल कटने के वक़्त अपनी ख़ुराक जमा' करती है।