गुनाह की ताकत खत्म हो चुकी है
1 पस हम क्या कहें? क्या गुनाह करते रहें ताकि फ़ज़ल ज़्यादा हो? 2 हरगिज़ नहीं हम जो गुनाह के ऐ’तिबार से मर गए क्यूँकर उस में फिर से ज़िन्दगी गुज़ारें?
1 पस हम क्या कहें? क्या गुनाह करते रहें ताकि फ़ज़ल ज़्यादा हो? 2 हरगिज़ नहीं हम जो गुनाह के ऐ’तिबार से मर गए क्यूँकर उस में फिर से ज़िन्दगी गुज़ारें?