14 इसलिए कि गुनाह का तुम पर इख़्तियार न होगा; क्यूँकि तुम शरी’अत के मातहत नहीं बल्कि फ़ज़ल के मातहत हो।
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14 इसलिए कि गुनाह का तुम पर इख़्तियार न होगा; क्यूँकि तुम शरी’अत के मातहत नहीं बल्कि फ़ज़ल के मातहत हो।
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