4 प्रेम धीरजवन्त हय, अऊर दयालु हय; प्रेम जलन नहीं करय; प्रेम अपनी बड़ायी नहीं करय, अऊर अपनो आप म फूलय नहाय, 7 ऊ सब बाते सह लेवय हय, सब बातों की विश्वास करय हय, सब बातों की आशा रखय हय, सब बातों म धीरज रखय हय।
4 प्रेम धीरजवन्त हय, अऊर दयालु हय; प्रेम जलन नहीं करय; प्रेम अपनी बड़ायी नहीं करय, अऊर अपनो आप म फूलय नहाय, 7 ऊ सब बाते सह लेवय हय, सब बातों की विश्वास करय हय, सब बातों की आशा रखय हय, सब बातों म धीरज रखय हय।