मसीहियों म मुकद्दमा बाजी
1 का तुम म सी कोयी ख या हिम्मत हय कि जब दूसरों को संग झगड़ा होय, त न्याय लायी जो परमेश्वर ख नहीं जानय? उन्को जवर जाये अऊर पवित्र लोगों को जवर नहीं जाये? 2 का तुम नहीं जानय कि पवित्र लोग जगत को न्याय करेंन? येकोलायी जब तुम्ख जगत को न्याय करनो हय, त का तुम छोटो सी छोटो झगड़ा को भी निपटारा करन को लायक नहीं? 3 का तुम नहीं जानय कि हम स्वर्गदूतों को न्याय करबोंन? त का सांसारिक बातों को निपटारा नहीं कर सकय? 4 यदि तुम्ख सांसारिक बातों को निपटारा करनो हय, त का उन्खच बैठावय जिन्ख मण्डली म कुछ नहीं समझ्यो जावय हंय? 5 मय तुम्ख शर्मिन्दा करन लायी यो कहू हय। का सचमुच तुम म एक भी बुद्धिमान नहीं मिलय, जो अपनो भाऊ को न्याय कर सकय?