18 व्यभिचार सी बच्यो रहो। जितनो अऊर पाप आदमी करय हय हि शरीर को बाहेर हंय, पर व्यभिचार करन वालो अपनोच शरीर को विरुद्ध पाप करय हय।
18 व्यभिचार सी बच्यो रहो। जितनो अऊर पाप आदमी करय हय हि शरीर को बाहेर हंय, पर व्यभिचार करन वालो अपनोच शरीर को विरुद्ध पाप करय हय।