जगत सी प्रेम मत करो
15 तुम नहीं त जगत सी अऊर नहीं जगत म की चिजों सी प्रेम रखो। यदि कोयी जगत सी प्रेम रखय हय, त ओको म बाप को प्रेम नहाय। 16 कहालीकि जो कुछ जगत म हय, मतलब शरीर की अभिलाषा अऊर आंखी की अभिलाषा अऊर जीविका को घमण्ड, ऊ बाप को तरफ सी नहीं पर जगत कोच तरफ सी हय।