17 पर जो कोयी को जवर जगत की जायजाद होना अऊर ऊ अपनो भाऊ ख गरीब देख क ओको पर तरस खानो नहीं चाहवय, त ओको म परमेश्वर को प्रेम कसो बन्यो रह्य सकय हय?
17 पर जो कोयी को जवर जगत की जायजाद होना अऊर ऊ अपनो भाऊ ख गरीब देख क ओको पर तरस खानो नहीं चाहवय, त ओको म परमेश्वर को प्रेम कसो बन्यो रह्य सकय हय?