17 जो बुजूर्ग मण्डली को अच्छो इन्तजाम करय हंय, विशेष कर क् हि जो वचन सुनावन अऊर सिखावन म मेहनत करय हंय, दोय गुना मजूरी को लायक समझ्यो जाये। 18 ५:१८ मत्ती १०:१०; लूका १०:७कहालीकि शास्त्र कह्य हय, "दांवन वालो बईल को मुंह मत बान्धजो," कहालीकि "मजूर अपनी मजूरी को हक्कदार हय।"