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2 Coríntios 2

1 मय अपनमन िि िहरजवर उदकरन नहीं आऊं। 2 कहि यदि मय उदकरू, ें, वल उच मय उदकरयहय? 3 अऊर मय िि कहीं असनहीं ि आनपर, ििलनमय उनउदं; कहि सब पर भरहय ि हय, उच सब हय4 बड़ो ु:अऊर मन कठिमय बहआसबहबहिो, नहीं ि उदपर ि बड़ो ो, हय

अपर

5 यदि उदकरयहय, खच नहीं बलि ओककडवभनहीं आऊ़ो-़ो सब उदकरयहय6 असआदमसजऊवों बहिो, बहहय7 अचहय ि ओकअपरकरअऊर िो, असनहीं ि आदमबहउदे। 8 वजह मय िनतकरहय ि ओख अपनसबे। 9 कहि मय िि परख ि सब ों नन ि नहीं। 10 करय हय ओख मय करहयकहि मय करयहय, यदि करयहय, हरवजह मसकरयहय, 11 ि हम पर नहीं चलें, कहि हम ओकिों अनजनहीं।

आस पर

12 २:१२ प्रेरितों २०:१ जब मय मससमवन आस शहर आयो, अऊर रभएक िो, 13 मन नहीं िो, ि मय अपननहीं ो, उनिमय मकििचलगयो।

मसिजय उतसव

14 पर परमवर धनयवमससदहम िजय उतसव ििरय हय, अऊर मसगनहमरहर वय हय15 कहि हम परमवर जवर उदवन अऊर मसगन16 मरन मरन गन, अऊर ितनवन वन गनइन ों यक हय? 17 कहि हम उन बहजसनहीं परमवर वचन अपनयदइसकरय ; सचमन अऊर परमवर तरफ गयपरमवर मन मसवक समलय

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