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2 Tessalonicenses 3

हमरथन

1 आखरऊवों-बहिों, हमरथनकरि रभसनअसजलेंअऊर ओख आदर करे, भयो, 2 अऊर हम ़ो अऊर आदमिों बचरहकहि हर एक सनपर िनहीं करयो।

3 पर रभियक हय; मजबिकरेंअऊर बचरखें4 हमरभहरपर भरहय ि आजहम , उननय हय, अऊर नतरहो।

5 परमवर अऊर मसिमत रभहरमन अगकरे।

करन उततरदि

6 ऊवों-बहिों, हम अपनरभमसआजि हर एक असिऊवों अलग रहअनिचलय अऊर िओन हम ओकअननहीं करय7 कहि नय हय ि ि हमरजसचलनिे, कहि जब हम हरआलसनहीं ो, 8 अऊर कट नहीं ी; पर हनत िअऊर धनकरत ि पर नहीं 9 नहीं ि हमअधिनह, पर ि अपनआप हरआदरठहरि हमरजसचलो। 10 कहि जब हम हरो, तब आजि "यदि करननहीं हवय नहीं े।"

11 हम नजहय ि हरआलसहय, अऊर नहीं करय पर सरों लय 12 असहम रभमसआजअऊर िनतकरजि पचकर अपनकरो।

13 , ऊवों-बहिों, भलकरनिमत मत ़ो। 14 यदि हमरिनहीं नय ओख पर नजर रखो, अऊर ओकगति मत करो, शरम आय15 तब ओख मन मत समझो, पर ििो।

आखर

16 अब रभि हय दच हमअऊर हर समय अऊर हर तरह ि े। रभसब रहे।

17 मय, , अपननमसिहय, तरह हर एक ििहय अऊर सहकरहय

18 हमररभमसअनरह सब पर रहें

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2 Tessalonicenses
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